कुछ ख़ास नहीं


कहने के लिए कुछ बात चाहिए
कुछ कौतुहल, कुछ विचार चाहिए
बहुत चुप रहे है इन दिनों
कुछ लफ्ज़ अब उधार चाहिए।
कविता दूर हैं
कितने दिन हुए !
फिर कोई इम्तिहान चाहिए।

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